देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी
बंध आँखो से
भीतर देखना सबसे बेहतर है..
रफ़्ता-रफ़्ता बुझ गया चिराग़-ए-आरजू ....
पहले दिल ख़ामोश था अब ख़्वाहिशें ख़ामोश हैं
"अपेक्षाएं" जहाँ खत्म होती हैं !
"सुकून" वहीं से शुरू होता है...!!
अगर कोई आप पर मरता है ना
तो कोशिश कीजिए
कि वो जिंदा रहे..
जज्बात लिखे तो मालूम हुआ…
पढ़े लिखे लोग भी पढ़ना नही जानते…
ख़्वाब में मैंने ख़ुदकुशी की थी,
नींद टूटी तो फिर से जीना पड़ा...
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