जिन्दगी की उलझनों ने; कम कर दी हमारी शरारते; और लोग समझते हैं कि; हम समझदार हो गये
Saturday, 29 February 2020
वो न आएगा कभी .. जानते हम भी हैं ..
वो न आएगा कभी .. जानते हम भी हैं ..
पर रस्म ए उल्फ़त का तक़ाज़ा है .. बुलाते रहिए ..
क्षमता और ज्ञान को हमेशा अपना गुरु बनाओ,
गुरुर नहीं..
कड़वा अब हो गया है , लहज़ा तो क्या.....
मीठी भी तो लगती थी ,
कभी बातें मेरी.......
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