जिन्दगी की उलझनों ने; कम कर दी हमारी शरारते; और लोग समझते हैं कि; हम समझदार हो गये
Saturday, 29 February 2020
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
हम तो नरम पत्तों की शाख़ हुआ करते थे,
छीले इतने गए कि खंज़र हो गए....!!!
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