तुम्हे भूलने का तो सवाल ही नही है,
मेरे खूबसूरत पलो का हिसाब हो तुम.........
"देखो.... मिलना तो हम तब भी चाहेंगे तुमसे
जब तुम्हारे पास वक्त और........... हमारे पास सासों की कमी होगी!"
तेरा आना ही बहुत था.......
मैंने कब कहा था की बात हो...
अच्छा लगता है तुम पढते हो हमे
जाहिर नही होने देते, वो अलग बात है ....
इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद...
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता...
ज़हर हो जाएंगे पकवान सारे
इन्हें अहसान की थाली में मत रख...
ये दबदबा, ये हुकूमत, ये नशा, ये दौलतें...
सब किरायेदार हैं,घर बदलते रहते हैं..
मुस्कुराहट, अपनापन, स्वभाव
ये सब अपने हैं
इनसे ही हम सब फलते फूलते हैं..
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