*इच्छाओं के अनुरूप जीने के*
*लिए जुनून चाहिए....*
*वरना परिस्थितियां तो सदा*
*विपरीत रहती हैं....*
सच है एहसान का भी बोझ बहुत होता है
चार फूलों से दबी जाती है तुर्बत मेरी
तुर्बत - tomb, grave
रब कहता है :
मत सोच रे बन्दे,
इतना ज़िन्दगी के बारे में !
मैंने ये ज़िंदगी दी है तो,
कुछ सोचा होगा तेरे बारे मे..
सिर्फ कहानी नहीं..
जिंदगी अधूरी हो गयी है
........................तेरे बिना !
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