[05/12, 7:54 am] Bansi Lal: तु दुश्मनी करके मुझसे जितने निकला था
दोस्ती कर लेता मैं खुद ही हार जाता...
[05/12, 7:55 am] Bansi Lal: कुछ तो मुझ से
दूरियां बना कर तो देखो
फिर पता चलेगा कि
कितना नजदीक था में
[05/12, 7:55 am] Bansi Lal: मसरूफ़ रहने का यह अंदाज़
कहीं तुझे तन्हा ना कर दे,
क्योंकि रिश्ते फुरसत के नहीं
तवज़्जो के मोहताज़ होते हैं...
[05/12, 7:56 am] Bansi Lal: जिंदगी दोस्तों में मिला करती है
और ये दोस्त भी अजीब होते हैं
देने को आयें तो जान तक दे देते हैं
और लेने पे आयें तो हसीं भी छीन लेते हैं
[05/12, 8:00 am] Bansi Lal: खामोशी अक्सर कूच बयान करती है .
भरी मेहफिल मै अपनी तनहाई
और
अकेले बंद कमरे में खयालो कि सौगात करती है
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