जिन्दगी की उलझनों ने; कम कर दी हमारी शरारते; और लोग समझते हैं कि; हम समझदार हो गये
Sunday, 20 December 2020
या तो जो ना-फ़हम हैं वो बोलते हैं इन दिनों
या तो जो ना-फ़हम हैं वो बोलते हैं इन दिनों
या जिन्हें ख़ामोश रहने की सज़ा मालूम है
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