[10/15, 7:06 AM] Bansi Lal: नहीं बस्ती किसी और की सूरत अब इन आँखों में
काश की हमने तुझे इतने गौर से न देखा होता
[10/15, 7:07 AM] Bansi Lal: प्रश्न को अच्छे से समझ लेना ही आधा उत्तर है।
~ सुकरात
[10/15, 7:08 AM] Bansi Lal: यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
[10/15, 7:12 AM] Bansi Lal: तू परहेज़ रख रिश्तों से ,
ये दिल को हर रोज़ ठेस खाना लाज़मी नहीं ।
[10/15, 8:31 AM] Bansi Lal: फ़क़ीर समझते रहे हम खुद को ज़माने से उफ्फ !
एक निगाह की जादूगरी !!!!!!
उस एक नज़र ने हमें मालामाल कर दिया !!
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