Wednesday, 28 October 2020

[10/25, 7:38 AM] Bansi Lal: मुकाम वो चाहिए की जिस दिन
भी हारु l

उस दिन जितने वाले से ज्यादा मेंरे
चर्चे हो ll
[10/28, 9:07 PM] Bansi Lal: लफ़्ज़ों ने ज़रूर कहा था....... अलविदा !

लेकिन मेरे लहजे ने हाथ जोड़े थे
[10/28, 9:09 PM] Bansi Lal: कैसे भुला दूँ मैं चाहतों का वो मौसम, 

जब मेरी आहों से सुलगती थी साँसें उसकी....
[10/28, 9:16 PM] Bansi Lal: अपने हंसने का वो जुर्माना भरा है हमने

मुस्कुरा के कोई मिलता है तो डर जाते हैं
[10/28, 9:17 PM] Bansi Lal: जो व्यक्ति सोने का बहाना कर रहा हो, 
उसे आप जगा नहीं सकते!
[10/28, 9:17 PM] Bansi Lal: एक बार देख तो लेते, आँखों की उदासियाँ..
मेरी मुस्कराहट से तुम, क्यूँ फरेब खा गए !
[10/28, 9:18 PM] Bansi Lal: दुनिया में नाम कमाने के लिए कभी कोई फूल नहीं खिलता है!
[10/28, 9:19 PM] Bansi Lal: अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो, जान थोड़ी है 
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है 

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में 
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है
[10/28, 9:20 PM] Bansi Lal: जनता क्या है ?

एक भेड़ है!
जो दूसरों की ठंड के लिए
अपनी पीठ पर
ऊन की फसल ढो रही है!
[10/28, 9:21 PM] Bansi Lal: बे पिए ही शराब से नफ़रत

ये जहालत नहीं तो फिर क्या है
[10/28, 9:22 PM] Bansi Lal: मैं तुम्हें भूल जाऊंगा एक दिन,

ये ख़्वाब रोज़ देखता हूँ भूल जाता हूँ!
[10/28, 9:22 PM] Bansi Lal: मैं... लिखता जा रहा हूं...
तुम... 

गहरी होती जा रही हो मुझमें...
[10/28, 9:24 PM] Bansi Lal: आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा 

आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
[10/28, 9:25 PM] Bansi Lal: तुम भी इसी हवा में साँस ले रही होंगी कहीं,

चलो  कुछ   तो  है  एक  जैसा हम में
[10/28, 9:25 PM] Bansi Lal: कहां तक साथ चलोगे तुम ?

मैं एक उजड़े हुए शहर का सन्नाटा हूं ,

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