Monday, 2 March 2020

जो इंसान "खुद"के लिये जीता है

जो इंसान "खुद"के लिये जीता है
उसका एक दिन "मरण" होता है ।

पर जो इंसान "दूसरों" के लिये जीता है
उसका हमेशा "स्मरण" होता है..


मोहब्बत को मजबूरियां ही ले डूबती है
.
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वरना ख़ुशी से कोई बेवफा नहीं होता


जख्म भी उसने माँ के निवाले की तरह दिये
.
.
बस एक और .. आखरी .. छोटा सा


 हालात सिखाते है 
बातें सुनना और सहना,

वरना हर शख्स 
फितरत से बादशाह होता है..


मेरे लिए संबंध का एक अर्थ है... 
भरोसा...
 अपनापन...
   और ईमानदारी...


हल्के हल्के बढ़ रही हैं चेहरे की लकीरें..!
नादानी और तजुर्बे का बटवारा हो रहा है..!!


लाख ये चाहा के उसको भूल जाऊं 'फराज़'
हौंसले अपनी जगह है, बेबसी अपनी जगह

-अहमद फ़राज़


शब्द को कुछ इस तरह तुमने चुना है

आलोचना स्तुति सी लग रही है

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